Sunday, September 5, 2010

बावरा मन

 मत इंतज़ार कराओ हमे इतना
कि वक़्त के फैसले पर अफ़सोस हो जाय
क्या पता कल तुम लौटकर आओ
और हम खामोश हो जाएँ
  
 
दूरियों से फर्क पड़ता नहीं
बात तो दिलों कि नज़दीकियों से होती है
दोस्ती तो कुछ आप जैसो से है
वरना मुलाकात तो जाने कितनों से होती है

 
    दिल से खेलना हमे आता नहीं
इसलिये इश्क की बाजी हम हार गए
शायद मेरी जिन्दगी से बहुत प्यार था उन्हें
इसलिये मुझे जिंदा ही मार गए

मना लूँगा आपको रुठकर तो देखो,
जोड़ लूँगा आपको टूटकर तो देखो।
नादाँ हूँ पर इतना भी नहीं ,
थाम लूँगा आपको छूट कर तो देखो।

1 comment:

Akanxa said...

kaafi gehraayi hai ....
bahut meaningful baatein likhi hain

I Liked!!

Well,I am obliged

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Kharagpur, West Bengal, India